पब्लिक स्कूलों की दो टूक, स्कूल ही निर्धारित करेंगे दाखिला प्वॉइंट

नर्सरी दाखिले में सरकार को कोर्ट जाने की चेतावनी 

नर्सरीदाखिले को लेकर राजधानी के पब्लिक स्कूलों की ओर से दो टूक कहा गया है कि दाखिले में स्कूलों द्वारा जो प्वॉइंट सिस्टम निर्धारित किए जाएंगे, उसी पर दाखिले होंगे, वरना न्यायालय के दरवाजे खुले हैं। स्कूलों ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के साथ हाल ही में हुई बैठक के बाद केवल एक किलोमीटर और घर से स्कूल की दूरी के आधार पर दाखिला प्वॉइंट निर्धारित करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा सिंगल चाइल्ड, सिबलिंग, गर्ल चाइल्ड, एलुमिनी आदि क्राइटेरिया के प्वाइंट नर्सरी दाखिले से हटाने के लिए कहा था। 

दिल्ली के प्राइवेट और एनएडेड स्कूलों की लीगल संस्था एक्शन कमेटी के अध्यक्ष एसके भट्टाचार्य ने बताया कि पब्लिक स्कूल अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और उनके संचालन के लिए स्वायत्त हैं। सभी स्कूलों पर संसद द्वारा निर्धारित दिल्ली एजुकेशन एक्ट का अनुसरण अनिवार्य है। एक्ट के नियम 145 में साफ लिखा है कि स्कूल के मुखिया को यह नियम निर्धारित करने का अधिकार है कि दाखिले कैसे करने हैं? इसके लिए वह स्वतंत्र है। नर्सरी दाखिले पर गांगुली कमेटी ने जो फार्मूला बनाया था, उसमें भी पब्लिक स्कूलों को दाखिला क्राइटेरिया तय करने में छूट दी गई। क्योंकि कोई स्कूल आबादी वाले क्षेत्र में बना है और कोई आबादी क्षेत्र से दूर, इसके आधार पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और कोर्ट ने भी पब्लिक स्कूलों के हक में फैसला सुनाया। हमने इन्हीं बातों को लिखकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को कह दिया है कि नर्सरी दाखिले में स्कूल ही दाखिला प्वाइंट तय करेंगे। केवल घर से दूरी के आधार पर दाखिले नहीं होंगे। क्योंकि जिस अभिभावक का एक बच्चा स्कूल में पड़ता है, वह अपने दूसरे बच्चे को दाखिला दिलाने के लिए कहां जाएगा। इसलिए सिबलिंग के प्वाइंट खत्म नहीं किए जा सकते। घर से स्कूल की दूसरी कम रहे, दाखिले में हमेशा इस बात के सबसे अधिक प्वाइंट स्कूल रखते हैं। सरकार की इस बात से स्कूल एग्री हैं, लेकिन सिबलिंग, सिंगल गर्ल चाइल्ड, गर्ल चाइल्ड और एलुमिनी के बच्चों को दाखिला देना भी स्कूल की जिम्मेदारी है। क्योंकि हर स्कूल अपने यहां छात्र-छात्राओं को लिंगानुपात बनाए रखना चाहता है। एक अभिभावक अपने दो बच्चों को एक ही स्कूल में पढ़ाना चाहता है। यह एेसे मानक हैं। जिसमें सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और अभिभावकों की परेशानी को समझना चाहिए। बकौल भट्टाचार्य सरकार अगर सहमत नहीं है तो वह कोर्ट जा सकती है। किसी प्रकार का दबाव नर्सरी दाखिले में सहन नहीं करेंगे, चाहे हाईकोर्ट ही क्यों जाना पड़े। 

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Source: http://www.bhaskar.com/news/UT-DEL-HMU-NEW-MAT-latest-new-delhi-news-032003-1545856-NOR.html